44 ମୁକ୍ତା ଚାଷ ଆରମ୍ଭ କରନ୍ତୁ, ମାସିକ ₹1 ଲକ୍ଷ ଆୟ କରନ୍ତୁ! ସରକାର ତାଲିମ ପ୍ରଦାନ କରୁଛନ୍ତି।

ମୁକ୍ତା ଚାଷ ଆରମ୍ଭ କରନ୍ତୁ, ମାସିକ ₹1 ଲକ୍ଷ ଆୟ କରନ୍ତୁ! ସରକାର ତାଲିମ ପ୍ରଦାନ କରୁଛନ୍ତି।

କମ ନିବେଶରେ ଅଧିକ ଲାଭ ପାଇବାକୁ ଚାହୁଁଥିବା ଲୋକଙ୍କ ପାଇଁ ମୁକ୍ତା ଚାଷ ଏକ ଉତ୍ତମ ବିକଳ୍ପ ହୋଇପାରେ। ପ୍ରାରମ୍ଭିକ ₹2 ଲକ୍ଷ ନିବେଶ ଆବଶ୍ୟକ। ଦେଢ଼ ବର୍ଷ ପରେ, ମୁକ୍ତା ପ୍ରସ୍ତୁତ ହେଲେ, ଆପଣ ପ୍ରତି ମାସରେ ହାରାହାରି ₹1 ଲକ୍ଷ ରୋଜଗାର କରିପାରିବେ। ଆଜିକାଲି, ଘରୋଇ ଏବଂ ଆନ୍ତର୍ଜାତୀୟ ବଜାରରେ ମୁକ୍ତାର ଚାହିଦା ଅଧିକ। ଗୁଣବତ୍ତା ଉପରେ ନିର୍ଭର କରି, ଗୋଟିଏ ମୁକ୍ତା ₹250 ରୁ ₹15,000 ମଧ୍ୟରେ ବିକ୍ରି ହୁଏ।


ଏହିପରି ମୁକ୍ତା ଚାଷ କରାଯାଏ...

ଭାରତୀୟ ମୁକ୍ତା ସଂସ୍କୃତିର ପ୍ରତିଷ୍ଠାତା ଅଶୋକ ମନୱାନୀଙ୍କ ଅନୁସାରେ, ପ୍ରାକୃତିକ ମୁକ୍ତା ଚାଷ ପରି ମୁକ୍ତା ଚାଷ କରାଯାଏ। ଆପଣ ସେଗୁଡ଼ିକୁ ପୋଖରୀରେ କିମ୍ବା 1,000 ବର୍ଗଫୁଟ ପୋଖରୀ ସୃଷ୍ଟି କରି ଚାଷ କରିପାରିବେ। ପୋଖରୀ ନିର୍ମାଣ କରିବା ପରେ, ବଜାର କିମ୍ବା ମାଛ ଫାର୍ମରୁ କଙ୍କାଳ କିଣନ୍ତୁ। ଗୁଣବତ୍ତା ଉପରେ ନିର୍ଭର କରି ପ୍ରତ୍ୟେକ କଙ୍କାଳର ମୂଲ୍ୟ ₹1.5 ରୁ ₹5 ମଧ୍ୟରେ। ଏବେ, କଙ୍କାଳକୁ 2-3 ଦିନ ପାଇଁ ପୋଖରୀରେ ରହିବାକୁ ଦିଅନ୍ତୁ। ଏହା ସିପ୍‌ର ମାଂସପେଶୀକୁ ଶିଥିଳ କରିଥାଏ, ଅସ୍ତ୍ରୋପଚାର ସହଜ କରିଥାଏ। ବିଶେଷଜ୍ଞମାନେ ତା’ପରେ ସିପ୍‌ର ଉପରେ ଅସ୍ତ୍ରୋପଚାର କରନ୍ତି, ଇଚ୍ଛିତ ମୁକ୍ତା ଡିଜାଇନର ଏକ ଫ୍ରେମ୍ ପ୍ରବେଶ କରାନ୍ତି। ପରେ, ସିପ୍‌ରଗୁଡ଼ିକୁ ଏକ ନାଇଲନ୍ ବ୍ୟାଗରେ 10 ଦିନ ପାଇଁ ପାଣିରେ ଭର୍ତ୍ତି ଏକ ବଡ଼ ପାତ୍ରରେ ରଖନ୍ତୁ। ଏହି ପାଣିରେ ଆଣ୍ଟିବାୟୋଟିକ୍ ମଧ୍ୟ ମିଶାଯାଏ। ଏହି ସମୟ ମଧ୍ୟରେ, ସିପ୍‌ରଗୁଡ଼ିକ ମରିନାହିଁ କି ନାହିଁ ତାହା ନିଶ୍ଚିତ କରିବା ପାଇଁ ପ୍ରତିଦିନ ଯାଞ୍ଚ କରାଯାଏ।

10 ଦିନ ପରେ ସିପ୍‌ରଗୁଡ଼ିକୁ ପୋଖରୀରେ ଛଡ଼ାଯାଏ

ମାନୱାନୀ ବ୍ୟାଖ୍ୟା କରିଥିଲେ ଯେ ଆଣ୍ଟିବାୟୋଟିକ୍ ଏକ୍ସପୋଜରର ପ୍ରାରମ୍ଭିକ 10 ଦିନ ପରେ, ବଞ୍ଚିଥିବା ଯେକୌଣସି ସିପ୍‌ରଗୁଡ଼ିକୁ ପୋଖରୀରେ ଛଡ଼ାଯାଏ। ଏହି ସିପ୍‌ରଗୁଡ଼ିକୁ ନାଇଲନ୍ ବ୍ୟାଗରେ (ପ୍ରତି ବ୍ୟାଗରେ ଦୁଇଟି ସିପ୍‌ର) ରଖାଯାଇଥାଏ ଏବଂ 1 ମିଟର ଗଭୀର ପୋଖରୀରେ ବାଉଁଶ କିମ୍ବା ପାଇପ୍‌ରୁ ଝୁଲାଇ ଦିଆଯାଏ। ନିଶ୍ଚିତ କରନ୍ତୁ ଯେ କୌଣସି ସିପ୍‌ର ବାଉଁଶରୁ ଝୁଲି ନ ଥାଏ, କିନ୍ତୁ ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ବୁଡ଼ି ନ ଥାଏ। ନିୟମିତ ଭାବରେ ପୋଖରୀରେ ଜୈବିକ ସାର ଯୋଡ଼ନ୍ତୁ। ଏହା ସିପ୍‌ର ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ବଜାୟ ରଖେ ଏବଂ ସେମାନଙ୍କ ମଧ୍ୟରେ ମୁକ୍ତା ଗଠନ ପ୍ରକ୍ରିୟାକୁ ତ୍ୱରାନ୍ୱିତ କରେ। ପ୍ରାୟ ଦେଢ଼ ବର୍ଷ ପରେ, ସମସ୍ତ ଖୋଳ ବାହାର କରାଯାଏ ଏବଂ ମୁକ୍ତା ବାହାର କରାଯାଏ।


ମାସିକ ରୋଜଗାର ୧ ଲକ୍ଷ ଟଙ୍କା ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ହୋଇପାରେ

ଏଜେଣ୍ଟମାନଙ୍କ ମାଧ୍ୟମରେ ଏହି ମୁକ୍ତାଗୁଡ଼ିକୁ ବିକ୍ରୟ କରିବା ଦ୍ୱାରା ପ୍ରତି ମୁକ୍ତା ପାଇଁ ହାରାହାରି ୨୫୦ ରୁ ୫୦୦ ଟଙ୍କା ମିଳିଥାଏ। ବଜାରରେ ନିଜେ ବିକ୍ରି କଲେ ୬୦୦ ରୁ ୮୦୦ ଟଙ୍କା ମିଳିଥାଏ। ଏହି ମୁକ୍ତାଗୁଡ଼ିକ ମଧ୍ୟରୁ ଅଧିକାଂଶ ଅହମ୍ମଦାବାଦ, ମୁମ୍ବାଇ, ବେଙ୍ଗାଲୁରୁ, ହାଇଦ୍ରାବାଦ, ସୁରଟ ଏବଂ ଅନ୍ୟାନ୍ୟ ମହାନଗରଗୁଡ଼ିକରେ କିଣାଯାଇଥାଏ। କିଛି ଉଚ୍ଚମାନର ମୁକ୍ତା ୨୦୦୦ ରୁ ୧୫,୦୦୦ ଟଙ୍କା ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ମିଳିଥାଏ। ସାଧାରଣତଃ, ଗୋଟିଏ ମୁକ୍ତା ଚାଷ ଜମିରେ ୨-୪ଟି ଏପରି ଉଚ୍ଚମାନର ମୁକ୍ତା ମିଳିଥାଏ। ଏସବୁକୁ ମିଶାଇ ହାରାହାରି ଆୟ ୧ ଲକ୍ଷ ଟଙ୍କା ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ହୋଇଥାଏ। ମୁକ୍ତା ସାଧାରଣତଃ ଗୋଲାକାର ହୋଇଥାଏ, କିନ୍ତୁ ଖୋଳ ଭିତରେ ଡିଜାଇନର ଫ୍ରେମ୍ ପ୍ରବେଶ କରି ଯେକୌଣସି ଡିଜାଇନର ମୁକ୍ତା (ଗଣେଶ, ଯୀଶୁ, କ୍ରସ୍, ଫୁଲ, ଇତ୍ୟାଦି) ସୃଷ୍ଟି କରାଯାଇପାରିବ। ଏଗୁଡ଼ିକ ଅଧିକ ମୂଲ୍ୟ ପାଏ। ମହାରାଷ୍ଟ୍ର, ଗୁଜରାଟ, ମଧ୍ୟପ୍ରଦେଶ ଏବଂ କର୍ଣ୍ଣାଟକରେ, ମୁକ୍ତା ୧୨ ରୁ ୧୫ ମାସ ମଧ୍ୟରେ ପ୍ରସ୍ତୁତ ହୁଏ। ଯେତେବେଳେ, ଉତ୍ତର ପ୍ରଦେଶ ଏବଂ ବିହାରରେ, ୧୮ ମାସ ସମୟ ଲାଗେ।


ସରକାର ମୁକ୍ତା ଚାଷ ପାଇଁ ତାଲିମ ପ୍ରଦାନ କରନ୍ତି।

ଭାରତୀୟ କୃଷି ଗବେଷଣା ପରିଷଦ (ICAR) ର CIAF ୱିଙ୍ଗ (ସେଣ୍ଟ୍ରାଲ ଇନଷ୍ଟିଚ୍ୟୁଟ୍ ଅଫ୍ ଫ୍ରେଷ୍ଟୱାଟର ଆକ୍ୱାକଲଚର) ମୁକ୍ତା ଚାଷରେ ମାଗଣା ତାଲିମ ପ୍ରଦାନ କରେ। ଏହି 15 ଦିନିଆ ତାଲିମ ଭୁବନେଶ୍ୱରର ବେଳାଭୂମି ନିକଟରେ ଅନୁଷ୍ଠିତ ହୁଏ। ଶଲ୍ୟଚିକିତ୍ସା ସମେତ ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ପ୍ରକ୍ରିୟା ଶିକ୍ଷା ଦିଆଯାଏ। ଏହି ତାଲିମରେ ଆଗ୍ରହୀ ବ୍ୟକ୍ତିମାନେ CIAF ସହିତ ଏହି ନମ୍ବରଗୁଡ଼ିକରେ ଯୋଗାଯୋଗ କରିପାରିବେ: 0674-2465421, 2465446। ଏହା ବ୍ୟତୀତ, ସରକାର ମୁକ୍ତା ଚାଷ ପାଇଁ ଋଣ ମଧ୍ୟ ପ୍ରଦାନ କରନ୍ତି। NABARD ଏବଂ ଅନ୍ୟାନ୍ୟ ବାଣିଜ୍ୟିକ ବ୍ୟାଙ୍କଗୁଡ଼ିକ 15 ବର୍ଷ ପାଇଁ ସ୍ୱତନ୍ତ୍ର ସୁଧ ହାରରେ ଏହି ଋଣ ପ୍ରଦାନ କରନ୍ତି। କେନ୍ଦ୍ର ସରକାର ସମୟ ସମୟରେ ସବସିଡି ଯୋଜନା ମଧ୍ୟ ପ୍ରଦାନ କରନ୍ତି।


ବଜାରର ମୂଲ୍ୟ 20,000 କୋଟି ଟଙ୍କା। ବିଶ୍ୱବ୍ୟାପୀ ମୁକ୍ତା ବ୍ୟବସାୟ 20,000 କୋଟି ଟଙ୍କାରୁ ଅଧିକ। ଭାରତ ବାର୍ଷିକ ₹50 କୋଟି ଟଙ୍କାରୁ ଅଧିକ ମୂଲ୍ୟର ମୁକ୍ତା ଆମଦାନୀ କରେ। ଭାରତର ବାର୍ଷିକ ମୁକ୍ତା ରପ୍ତାନି ମଧ୍ୟ ₹100 କୋଟି ଟଙ୍କାରୁ ଅଧିକ।



ଚାଷୀମାନେ ମୁକ୍ତା ଚାଷ କରି ଲକ୍ଷ ଲକ୍ଷ ଟଙ୍କା ରୋଜଗାର କରିପାରିବେ। ଏହା କିପରି କରିବେ ତାହା ଏଠାରେ ଦିଆଯାଇଛି। https://jaibik-kheti.blogspot.com/2025/03/43.html


ମୁକ୍ତା ଚାଷ ଆରମ୍ଭ କରନ୍ତୁ, ମାସିକ ₹1 ଲକ୍ଷ ଆୟ କରନ୍ତୁ! ସରକାର ତାଲିମ ପ୍ରଦାନ କରୁଛନ୍ତି। https://jaibik-kheti.blogspot.com/2025/03/44.html


୧୦x୧୦ ଫୁଟ ପୋଖରୀରୁ ଲକ୍ଷ ଲକ୍ଷ ଟଙ୍କା ରୋଜଗାର https://jaibik-kheti.blogspot.com/2025/03/08.html




शुरू करें मोतियों की खेती, होगी 1 लाख की मंथली इनकम ! सरकार दे रही है ट्रेनिंग



कम इन्वेस्टमेंट में ज्यादा प्रॉफिट पाने की इच्छा रखने वालों के लिए मोतियों की खेती एक बेहतर विकल्‍प हो सकती है। इसके लिए 2 लाख रुपए का शुरुआती इन्वेस्टमेंट करना पड़ता है। डेढ़ साल बाद जब मोती तैयार हो जाते हैं तब एवरेज 1 लाख रुपए मंथली तक कमाई कर सकते हैं। बता दें, इन दिनों घरेलू और इंटरनेशनल मार्केट में मोती की काफी मांग है। क्वालिटी के हिसाब से मार्केट में एक मोती 250 रुपए से 15 हजार रुपए तक बिकता है।

ऐसे होती है मोतियों की खेती… 

इंडियन पर्ल कल्चर के फाउंडर अशोक मनवानी के मुताबिक मोतियों की खेती वैसे ही की जाती है जैसे नेचुरल रूप से मोती तैयार होती है। इसकी खेती आप किसी तालाब में या फिर 1000 वर्गफीट का तालाब बनाकर कर सकते हैं। तालाब बनाने के बाद मार्केट या मछली घर से सीप खरीदें। क्वालिटी के हिसाब एक सीप करीब 1.5 से 5 रुपए के बीच पड़ता है अब 2-3 दिन के लिए सीपों को तालाब में रहने दें। इससे सीपों की मांसपेशियां ढीली हो जाती है और आसानी से सर्जरी हो पाती है। फिर एक्सपर्ट की मदद से सीपों की सर्जरी कर उसके अंदर जिस डिजाइन का मोती चाहिए हो उसका फ्रेम डाला जाता है। इसके बाद नायलॉन के बैग में सीप को पानी भरे बड़े बर्तन में 10 दिन के लिए रख दें। इस पानी में एंटीबायोटिक भी मिला दें। इस दौरान डेली सीप की जांच होती है कि कहीं ये मर तो नहीं गए हैं।

10 दिन बाद तालाब में डालें सीप 

मनवानी ने बताया कि शुरुआती 10 दिन एंटीबायोटिक पानी में रहने के बाद जितने सीप जिंदा बचते हैं उन्हें तालाब में डाला जाता है। इन सीपों को नायलॉन के बैग में रखकर (1 बैग में 2 सीप) बांस या पाइप के सहारे तालाब में 1 मीटर गहरे पानी में लटका दिया जाता है। ध्यान रहे कोई भी सीप ऐसा ना रह जाए जो बांस पर लटका होने के बावजूद पूरी तरह से पानी से ना हो। बीच-बीच ऑर्गेनिक खाद तालाब में डालते रहें। इससे सीप की हेल्थ सही रहती है और सीपों के अदंर मोती बनने की प्रोसेस भी तेज हो जाती है। करीब डेढ साल बाद सभी सीपों को बाहर निकालकर उनमें से मोती बाहर निकाल ली जाती है।


मंथली 1 लाख तक हो सकती है कमाई 

एजेंट के जरिए इन मोतियों को बेचने पर औसतन 250 से 500 रुपए प्रति मोती मिलते हैं। वहीं, खुद मार्केट में बेचने पर ये आंकड़ा 600 से 800 रुपए तक होता है। देश में इन मोतियों की ज्यादा खरीद अहमदाबाद, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, सूरत और बाकी महानगरों में होती है। कुछ हाई क्वालिटी की मोतियों के लिए 2000 से 15 हजार रुपए तक भी मिल जाते हैं। अमूमन मोती खेती के एक लॉट में ऐसी 2-4 हाई क्वालिटी की मोतियां निकल ही आती हैं। सबको जोड़कर एवरेज 1 लाख तक कमाई हो जाती है। आम तौर पर मोती गोल होता है लेकिन सीप के अंदर डिजाइनर फ्रेम डालने से किसी भी डिजाइन (गणेश, ईसा, क्रॉस, फूल, आदि) की मोती तैयार हो जाती है। इनकी ज्यादा कीमत मिलती है। बता दें, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और कर्नाटक में 12 से 15 महीने में मोतियां तैयार हो जाती हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश और बिहार में इसके लिए 18 महीने लगते हैं।

मोतियों की खेती के लिए सरकार कराती है ट्रेनिंग 

इंडियन काउंसिल फॉर एग्रीकल्‍चर रिसर्च (ICAR) की CIAF विंग (सेंट्रल इंस्‍टीट्यूट ऑफ फ्रेश वॉटर एक्‍वाकल्‍चर) मोतियों की खेती के लिए फ्री ट्रेनिंग देती है। 15 दिनों की ये ट्रेनिंग भुवनेश्वर में समुद्र तट के पास होती है। इसमें सर्जरी समेत पूरी प्रोसेस सीखाते हैं। जिसे भी ये ट्रेनिंग लेनी हो वो CIAF के इन नंबरों पर बात कर सकता है। 0674 – 2465421, 2465446. इतना ही नहीं, सरकार मोतियों की खेती के लिए लोन भी देती है। नाबार्ड और अन्य कॉमर्शियल बैंक 15 साल के लिए स्पेशल इंट्रेस्ट रेट पर ये लोन देते हैं। साथ ही केंद्र सरकार की ओर से इस पर सब्सिडी की योजनाएं भी समय-समय पर चलाई जाती हैं।

20 हजार करोड़ का है मार्केट  मोतियों का वर्ल्डवाइड बिजनेस करीब 20 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का है। इंडिया हर साल करीब 50 करोड़ रुपए से अधिक के मोती इम्पोर्ट करता है। वहीं, इंडिया से सालाना मोतियों का एक्‍सपोर्ट भी 100 करोड़ रुपए से अधिक का है।


45  मोती की खेती कर लाखों कमाता है ये किसान, जानें कैसे पैदा होता है ये रत्न  

https://jaibik-kheti.blogspot.com/2025/03/45.html







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