02 ଜୈବିକ ସାରର ଲାଭ

ଜୈବିକ ସାରର ଲାଭ


ଜୈବିକ ସାର ବ୍ୟବହାର ମାଟିର ଜୈବିକ ସାମଗ୍ରୀକୁ ବୃଦ୍ଧି କରେ, ଯାହା ଲାଭଦାୟକ ଜୀବାଣୁ ସଂଖ୍ୟା ବୃଦ୍ଧି କରେ ଏବଂ ମାଟିକୁ ଉର୍ବର ରଖେ।

● ଜୈବିକ ସାର ଉଦ୍ଭିଦ ବୃଦ୍ଧି ପାଇଁ ଆବଶ୍ୟକୀୟ ଖଣିଜ ପଦାର୍ଥ ପ୍ରଦାନ କରେ, ଯାହା ପରେ ମାଟିର ଅଣୁଜୀବମାନଙ୍କ ଦ୍ୱାରା ଶୋଷିତ ହୁଏ, ଯାହା ସୁସ୍ଥ ଗଛଲତା ସୃଷ୍ଟି କରେ ଏବଂ ଉତ୍ପାଦନ ବୃଦ୍ଧି କରେ।

● ଜୈବିକ ସାର ରାସାୟନିକ ସାର ଅପେକ୍ଷା ଶସ୍ତା, ଅଧିକ ସ୍ଥାୟୀ ଏବଂ ପ୍ରସ୍ତୁତ କରିବା ସହଜ।

ସେମାନଙ୍କର ବ୍ୟବହାର ମାଟିର ହ୍ୟୁମସ୍ ବୃଦ୍ଧି କରେ ଏବଂ ମାଟିର ଭୌତିକ ଅବସ୍ଥାକୁ ଉନ୍ନତ କରେ।

● ଉଦ୍ଭିଦ ବୃଦ୍ଧି ପାଇଁ ଆବଶ୍ୟକୀୟ ପୋଷକ ତତ୍ତ୍ୱ, ଯେପରିକି ନାଇଟ୍ରୋଜେନ, ଫସଫରସ୍ ଏବଂ ପଟାସ, ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ପରିମାଣର ଦ୍ୱିତୀୟ ପୋଷକ ତତ୍ତ୍ୱ ସହିତ, ଜୈବିକ ସାର ବ୍ୟବହାର ମାଧ୍ୟମରେ ଯୋଗାଇ ଦିଆଯାଏ।

● କୀଟପତଙ୍ଗ, ରୋଗ ଏବଂ ଘାସ ଫସଲ ପରିବର୍ତ୍ତନ, କୀଟପତଙ୍ଗର ପ୍ରାକୃତିକ ଶତ୍ରୁ, ପ୍ରତିରୋଧୀ କିସମ ଏବଂ ଜୈବିକ ଉତ୍ପାଦ ମାଧ୍ୟମରେ ମୁଖ୍ୟତଃ ନିୟନ୍ତ୍ରଣ କରାଯାଏ।

● ଯେତେବେଳେ ଜୈବିକ ସାର ପଚିଯାଏ, ସେମାନେ ଜୈବିକ ଏସିଡ୍ ଉତ୍ପାଦନ କରନ୍ତି ଯାହା ମାଟିର ଅଦ୍ରବଣୀୟ ଉପାଦାନଗୁଡ଼ିକୁ ଦ୍ରବଣୀୟ ରୂପରେ ପରିଣତ କରେ, ମାଟିର pH 7 ତଳେ ହ୍ରାସ କରେ। ଏହା ଫସଲ ଉତ୍ପାଦନ ପାଇଁ ଆବଶ୍ୟକୀୟ ସୂକ୍ଷ୍ମ ପୋଷକ ତତ୍ତ୍ୱର ଉପଲବ୍ଧତାକୁ ବୃଦ୍ଧି କରେ।

● ଏହି ସାର ବ୍ୟବହାର କରିବା ଦ୍ୱାରା ଗଛଗୁଡ଼ିକୁ ଦୀର୍ଘ ସମୟ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ପୁଷ୍ଟିକର ପଦାର୍ଥ ମିଳିଥାଏ। ଏହି ସାରଗୁଡିକ ମାଟିରେ ସେମାନଙ୍କର ଅବଶିଷ୍ଟ ଗୁଣ ଛାଡିଥାଏ। ତେଣୁ, ଗୋଟିଏ ଫସଲ ପାଇଁ ଏହି ସାର ବ୍ୟବହାର କରିବା ଦ୍ଵାରା ଅନ୍ୟ ଏକ ଫସଲକୁ ଲାଭ ମିଳିଥାଏ। ଏହା ମାଟିର ଉର୍ବରତା ସନ୍ତୁଳନ ବଜାୟ ରଖେ।



 जैविक खाद के लाभ



जैविक खाद के लाभ

  • जैविक खादों के प्रयोग से मृदा का जैविक स्तर बढ़ता है, जिससे लाभकारी जीवाणुओं की संख्या बढ़ जाती है और मृदा काफी उपजाऊ बनी रहती है।
    ● जैविक खाद पौधों की वृद्धि के लिए आवश्यक खनिज पदार्थ प्रदान कराते हैं, जो मृदा में मौजूद सूक्ष्म जीवों के द्वारा पौधों को मिलते हैं जिससे पौधों स्वस्थ बनते हैं और उत्पादन बढ़ता है।



● रासायनिक खादों के मुकाबले जैविक खाद सस्ते, टिकाऊ तथा बनाने में आसान होते हैं।
इनके प्रयोग से मृदा में ह्यूमस की बढ़ोतरी होती है व मृदा की भौतिक दशा में सुधार होता है।
● पौध वृद्धि के लिए आवश्यक पोषक तत्वों जैसे नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश तथा काफी मात्रा में गौण पोषक तत्वों की पूर्ति जैविक खादों के प्रयोग से ही हो जाती है।
● कीटों, बीमारियों तथा खरपतवारों का नियंत्रण काफी हद तक फसल चक्र, कीटों के प्राकृतिक शत्रुओं, प्रतिरोध किस्मों और जैव उत्पादों द्वारा ही कर लिया जाता है।
● जैविक खादें सड़ने पर कार्बनिक अम्ल देती हैं जो भूमि के अघुलनशील तत्वों को घुलनशील अवस्था में परिवर्तित कर देती हैं, जिससे मृदा का पी-एच मान 7 से कम हो जाता है। अतः इससे सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ जाती है। यह तत्व फसल उत्पादन में आवश्यक है।
● इन खादों के प्रयोग से पोषक तत्व पौधों को काफी समय तक मिलते हैं। यह खादें अपना अवशिष्ट गुण मृदा में छोड़ती हैं। अतः यह एक फसल में इन खादों के प्रयोग से दूसरी फसल को लाभ मिलता है। इससे मृदा उर्वरता का संतुलन ठीक रहता है











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