35 सिंचाई के लिए कमाल का है यह बर्षा पंप, न बिजली की जरूरत और न ही ईंधन की

 सिंचाई के लिए कमाल का है यह बर्षा पंप, न बिजली की जरूरत और न ही ईंधन की



लखनऊ। अपने खेतों में सिंचाई के लिए परेशान होने वाले किसान भाईयों के लिए एक अच्छी खबर है। अब किसानों के लिए एक ऐसा नया पंप आया है, जिसको चलाने के लिए न तो किसानों को बिजली की व्यवस्था करनी पड़ेगी और न ही डीजल या पेट्रोल की। इस पंप की मदद से किसान बिना रुपये-पैसे खर्च किये अपने खेतों की सिंचाई आराम से कर सकेंगे।

बर्षा पंप से किसानों के खेतों में होगी वर्षा
हाल में नीदरलैंड के शोधकर्ताओं ने खेतों में सिंचाई को बेहद आसान बनाने के लिए एक नया सिंचाई पंप विकसित किया है। यह एक ऐसा बर्षा पंप है, जिसके लिए किसानों को बिजली या ईंधन का खर्च भी नहीं उठाना पड़ेगा। बस किसानों को इस पंप को नहर या नदी में रखना होगा और इसके सहारे किसान आसानी से अपने आस-पास के खेतों में सिंचाई कर सकेंगे। किसानों के लिए यह एक तरह का बिल्कुल नया उपकरण है, जिसके इस्तेमाल से किसानों को सिंचाई संबंधी एक बड़ी समस्या दूर हो सकेगी।

किसानों के लिए सिंचाई बड़ी समस्या
अपने खेतों में सिंचाई के लिए किसानों को बड़ी मुश्किल उठानी पड़ती है। एक तरफ जहां कुछ किसान आस-पास की नदियों, नालों या नहर में सिंचाई पाइप लगाकर डीजल पंप के जरिये अपने खेतों की सिंचाई करते देखे जा सकते हैं, वहीं दूसरी ओर किसान अन्य जटिल तरीकों से खेतों से सिंचाई की व्यवस्था करते हैं, ताकि अपने खेतों में सही स्थिति और समय पर रोपाई कर सकें।


नदी या नहर में अपने आप चलेगा बर्षा पंप

बर्षा पंप से किसानों को मिलेगी राहत
असल में बर्षा पंप का निर्माण नीदरलैंड की कंपनी क्यूस्टा ने किया है। इस बर्षा पंप के लिए यूरोपीय संस्था क्लाईमेट केवाईसी की ओर से यूरोप की इस साल की सबसे बड़ी तकनीकि खोज का अवॉर्ड दिया गया है। शोधकर्ताओं की मानें तो यह एक तरह का बिल्कुल नया उपकरण है और विकासशील देशों में यह तकनीक बहुत कारगार साबित होगी। चूंकि पहला बर्षा पंप इस साल नेपाल में लगाया गया है और नेपाल में बारिश को बर्षा कहा जाता है। इसलिए इस पंप का नाम बर्षा रखा गया है।

ऐसे चलता है बर्षा पंप
असल में यह पंप पानी की लहरों से चलता है। लहरों से टकराकर बर्षा पंप का एक बड़ा सा पहिया घूमता है और इससे वायु का दबाव बनता है। इस वायु के दबाव की वजह से ही पानी को एक नली के जरिये किसानों के खेतों तक पहुंचा देता है। ऐसे में नदी, नहर या नालों में पानी की लहर की गति ही इस पंप के लिए कारगार होती है और जितनी तेज पानी की रफ्तार होगी, उतनी दूर तक किसानों के खेत तक पानी पहुंच सकेगा। सबसे बड़ी बात यह है कि प्रदूषण न फैलाने की वजह से यह बर्षा पंप पर्यावरण के भी अनुकूल है। अब एशिया में ही नहीं, बल्कि लैटिन अमेरिका और अफ्रीका में इस बर्षा पंप के निर्माण की तैयारी शुरू की जा रही है।

इस तरह बढ़ेगा उत्पादन
शोधकर्ताओं की मानें तो इस बर्षा पंप के जरिए फसल का उत्पादन 5 गुना तक बढ़ाया जा सकता है। यह पंप एक लीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से पानी छोड़ता है। पानी की रफ्तार अच्छी होने पर इस पंप के जरिये 82 फीट की ऊंचाई तक भी पानी को पहुंचाया जा सकेगा। सबसे अच्छी बात यह है कि एक साल में ही इस पंप की पूरी लागत वसूल हो जाएगी।


36  20 साल नौकरी के बाद की फूलों की खेती, फूलो की तरह खिले गाँव वालो के चहरे  

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