07 ଚତୁର୍ଥ ଶ୍ରେଣୀରେ ତିନିଥର ବିଫଳ ହେବା ଦ୍ୱାରା କିଛି ଅକଳ୍ପନୀୟ ସଫଳତା ମିଳିଲା।
ଚତୁର୍ଥ ଶ୍ରେଣୀରେ ତିନିଥର ବିଫଳ ହେବା ଦ୍ୱାରା କିଛି ଅକଳ୍ପନୀୟ ସଫଳତା ମିଳିଲା।
ରାୟପୁର। ଦୁର୍ଗର ସିରସାର ଜଣେ ଚାଷୀ ଅଶୋକ ଚନ୍ଦ୍ରକର ତିନିଥର ଚତୁର୍ଥ ଶ୍ରେଣୀରେ ବିଫଳ ହୋଇଥିଲେ ଏବଂ 12 ବର୍ଷ ବୟସରେ ପନିପରିବା ବିକ୍ରି କରିବା ଆରମ୍ଭ କରିଥିଲେ। ସେ ରାସ୍ତାରୁ ରାସ୍ତା ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ବୁଲି ପନିପରିବା ବିକ୍ରି କରୁଥିଲେ। ଆଜି ତାଙ୍କର 100 ଏକର ଜମି ଅଛି ଏବଂ ଭଡାଟିଆ ଫାର୍ମ ସମେତ ମୋଟ 900 ଏକର ଚାଷ କରନ୍ତି। ସେ 700 ରୁ ଅଧିକ ଲୋକଙ୍କୁ ନିଯୁକ୍ତି ମଧ୍ୟ ଦେଇଛନ୍ତି।
ସେ ପୂର୍ବରୁ ଯାତ୍ରା କରି ପନିପରିବା ବିକ୍ରୟ କରୁଥିଲେ, ଏବେ ବିଭିନ୍ନ ରାଜ୍ୟକୁ 10 କୋଟି ଟଙ୍କାର ପନିପରିବା ଯୋଗାଣ କରନ୍ତି।
ବିଭିନ୍ନ ଦେଶକୁ 10 କୋଟି ଟଙ୍କାର ପନିପରିବା ଯୋଗାଣ କରନ୍ତି...
ଆଜି, ଅଶୋକ ଦେଶର ବିଭିନ୍ନ ସ୍ଥାନକୁ ବାର୍ଷିକ 10 କୋଟି ଟଙ୍କାର ପନିପରିବା ଯୋଗାଣ କରନ୍ତି। 1973 ମସିହାରେ ଜନ୍ମଗ୍ରହଣ କରିଥିବା ଅଶୋକ ପାଠପଢ଼ାରେ ଆଗ୍ରହୀ ନଥିଲେ, ତେଣୁ ସେ କାମ ଉପରେ ଧ୍ୟାନ ଦେଇଥିଲେ। ତାଙ୍କ ବାପାମାଆ ଗାଁର ଏକ ଘରେ କାମ କରୁଥିଲେ। 14 ବର୍ଷ ବୟସରେ, ଅଶୋକ ତାଙ୍କ ଜେଜେମାଙ୍କଠାରୁ ଏକ ଜମି ଭଡା ନେଇ ପନିପରିବା ଚାଷ କରିବା ଆରମ୍ଭ କରିଥିଲେ। ସେ ଏହାକୁ ନିଜେ ବିକ୍ରୟ କରି ଚାରୋଡା, ସୁପେଲା ଭିଲାଇ ଏବଂ ଚାନ୍ଦଖୁରୀର ରାସ୍ତାରେ ବୁଲି ବୁଲି ବିକ୍ରି କରୁଥିଲେ। ଏହି ଟଙ୍କାରେ ସେ ପ୍ରଥମେ ରେଘାରେ ତିନି ଏକର, ତାପରେ ଚାରି ଏକର, ତାପରେ ପାଞ୍ଚ ଏକର ଏବଂ ଶେଷରେ ଦଶ ଏକର ଜମି ହାସଲ କରିଥିଲେ। ତାଙ୍କର ବ୍ୟବସାୟ ବଢ଼ିବାକୁ ଲାଗିଲା।
ଏହି ସ୍ଥାନଗୁଡ଼ିକରେ ଜମି
ଆଜି, ଅଶୋକଙ୍କର ସିରସା ଏବଂ ତାରା ସମେତ ଅନେକ ସ୍ଥାନରେ 100 ଏକର ଜମି ଅଛି। ସେ ନାଗପୁରା, ସୁରଗି, ମତୱାରୀ, ଦେବଡା, ଜାଞ୍ଜଗିରି ଏବଂ ସିରସା ଭଳି ଗାଁରେ ଜମି ଲିଜ୍ ନେଇଛନ୍ତି, ଯେଉଁଠାରେ ସେ ପନିପରିବା ଚାଷ କରନ୍ତି। ଏଥିମଧ୍ୟରୁ, ନାଗପୁରାରେ ଟମାଟୋ ଚାଷ ଅନ୍ତର୍ଗତ ସର୍ବାଧିକ 200 ଏକର ଜମି ଅଛି। ଆଜି, ତାଙ୍କର 25 ରୁ ଅଧିକ ଟ୍ରାକ୍ଟର ଏବଂ ଅନ୍ୟାନ୍ୟ ଯାନବାହାନ ଅଛି। ତାଙ୍କ ପାଖରେ ଆଧୁନିକ ମେସିନ୍ ଅଛି ଯାହା କୀଟନାଶକ ସିଞ୍ଚନ ଠାରୁ ଆରମ୍ଭ କରି ପନିପରିବା ଅମଳ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ସବୁକିଛି ପରିଚାଳନା କରେ।
କଠିନ ପରିଶ୍ରମର କୌଣସି ବିକଳ୍ପ ନାହିଁ
ଅଶୋକଙ୍କ ଅନୁସାରେ, ଆଜିକାଲି ଲୋକମାନେ ସର୍ବଦା ସର୍ଟକଟ୍ ଖୋଜୁଛନ୍ତି। ଯଦି ଆପଣ ଏକ ଯୋଜନାରେ ଲାଗି ରୁହନ୍ତି ଏବଂ ଅପେକ୍ଷା କରନ୍ତି, ତେବେ ଆପଣ ନିଶ୍ଚିତ ଭାବରେ ଫଳାଫଳ ଦେଖିବେ। କଠିନ ପରିଶ୍ରମର କୌଣସି ବିକଳ୍ପ ନାହିଁ। ଗତକାଲି ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ, ମୁଁ ଦୁଇ ହଜାର ଟଙ୍କା ପାଇଁ ଲୋଭୀ ଥିଲି, ଏବଂ ଆଜି ମୁଁ 15,000 ଟଙ୍କା ଦେଉଛି।
चौथी क्लास में तीन बार फेल ने वो कर दिखाया जो लोग सोच भी नहीं सकते

रायपुर. दुर्ग के सिरसा के किसान अशोक चंद्राकर चौथी क्लास में तीन बार फेल हो गए, तो 12 साल की उम्र में सब्जी बेचनी शुरू की। वे गली-गली घूमकर सब्जी बेचा करते थे। आज उनके पास 100 एकड़ जमीन है और रेंट के खेतों को मिलाकर कुल 900 एकड़ में खेती करते हैं। उन्होंने करीब 700 से ज्यादा लोगों को रोजगार भी दिया है।
घूमकर बेचते थे सब्जी, अब कई राज्यों में करते हैं 10 करोड़ की सब्जियां सप्लाई
अलग-अलग देशों में 10 करोड़ की सब्जियां कर रहे सप्लाई…
आज अशोक सालाना 10 करोड़ की सब्जियां देश के अलग-अलग हिस्सों में सप्लाई करते हैं। 1973 में जन्मे अशोक का पढ़ाई में मन लगा नहीं, इसलिए उन्होंने काम में मन लगाया। उनके माता-पिता गांव के ही एक घर में काम किया करते थे। अशोक ने 14 साल की उम्र में नानी से एक खेत बटाई पर लेकर सब्जी उगानी शुरू की। इसे वे खुद घूम-घूमकर चरोदा, सुपेला भिलाई, चंदखुरी की गलियों में बेचते। इसी पैसे से पहले तीन, फिर चार, पांच आगे चलकर दस एकड़ खेत रेघा में ले लिया। उनका कारोबार बढ़ने लगा।
इन जगहों पर है जमीन
अशोक के पास आज सौ एकड़ की मालिकाना जमीन सिरसा, तर्रा सहित कई जगहों पर है। इसके अलावा नगपुरा, सुरगी, मतवारी, देवादा, जंजगीरी, सिरसा जैसे गांवों में बटाई की जमीन है, जिस पर सब्जियां उगाई जा रही हैं। इसमें नगपुरा में सबसे अधिक दो सौ एकड़ पर टमाटर लगा है। आज उनके पास 25 से ज्यादा ट्रैक्टर व दूसरी गाड़ियां हैं। आधुनिक मशीनें हैं, जो दवा छिड़काव से लेकर सब्जियों को काटने का काम करती हैं।
मेहनत का कोई विकल्प नहीं
अशोक के मुताबिक आजकल लोग शार्टकट के चक्कर में रहते हैं, अगर आप किसी प्लान पर लगातार चलते हैं और इंतजार करते हैं, तो आपको रिजल्ट जरूर मिलेंगे। मेहनत का कोई ऑप्शन हो ही नहीं सकता। कल तक मैं दो-दो हजार के लिए तरसता था और आज 15-15 हजार रुपए वेतन दे रहा हूं।
साभार: भास्कर
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