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Showing posts from March, 2025

65 हरियाणा के किसान ने उगाया अनोखा फुल ! 2 महीने तक नहीं मुरझाता

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  हरियाणा के किसान ने उगाया अनोखा फुल ! 2 महीने तक नहीं मुरझाता हरियाणा के किसान देश और विदेश में अपनी खेती के लिए फेमस है। पलवल जिले के प्रगतिशील किसान बिजेंद्र दलाल उन्हीं में से एक है। वे तकनीक के साथ फूलों की खेती कर लाखों रुपए की आमदनी ले रहे हैं। हरियाणा, पंजाब व उत्तरप्रदेश के किसानों के लिए वे रोल मॉडल से कम नहीं हैं। दूर-दूर से लोग उनसे जानकारी लेने पहुंचते हैं। गुलाब और ब्रासिका की करते हैं खेती… – 1984 से खेती कर रहे बिजेंद्र दलाल बताते हैं कि शुरूआत में तो उन्होंने परंपरागत खेती की लेकिन धीरे-धीरे जानकारी बढ़ी तो फूलों की खेती शुरू की। – आज वे बड़े स्तर पर गुलाबों की खेती कर रहे हैं। उन्होंने नेट हाउस में साढ़े आठ एकड़ जमीन पर 25 से 30 हजार गुलाब के पौधे लगा रखे हैं। – इन पर उनकी कोस्ट लगभग 25 लाख रुपए आई। फसल आने के पहले साल 5 लाख रुपए मुनाफा लिया और अगले 4 साल तक 10 लाख रुपए मुनाफा आने का अनुमान है। जापान से बीज मंगाकर उगाया ब्रासिका – बिजेंद्र दलाल ने अपने खेतों में 60 दिनों तक न मुरझाने वाला फूल ब्रासिका भी उगाया था। इसका बीज उन्होंने जापान से मंगाया था। यह फूल 2 मह...

64 डॉक्टरी की पढ़ाई छोड़कर शुरू की खेती, हर महीने कमाता है लाखों रुपए

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  डॉक्टरी की पढ़ाई छोड़कर शुरू की खेती, हर महीने कमाता है लाखों रुपए 27 साल के संदेश पाटिल ने केवल ठंडे मौसम में फलने-फूलने वाली केसर की फसल को महाराष्ट्र के जलगांव जैसे गर्म इलाके में उगाकर लोगों को हैरत में डाल दिया है। उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई छोड़कर जिद के बलबूते अपने खेतों में केसर की खेती करने की ठानी और अब वे हर महीने लाखों का मुनाफा भी कमा रहे हैं। इसके लिए उन्होंने लोकल और ट्रेडिशनल फसल के पैटर्न में बदलाव किए।  इंटरनेट से ली खेती की जानकारी… जलगांव जिले के मोरगांव खुर्द में रहने वाले 27 साल के संदेश पाटिल ने मेडिकल ब्रांच के बीएएमएस में एडमिशन लिया था, लेकिन इसमें उनका मन नहीं लगा। उनके इलाके में केला और कपास जैसी लोकल और पारंपरिक फसलों से किसान कुछ खास मुनाफा नहीं कमा पाते थे। इस बात ने संदेश को फसलों में एक्सपेरिमेंट करने के चैलेजिंग काम को करने इंस्पायर किया। इसके बाद उन्होंने सोइल फर्टिलिटी की स्टडी की। उन्होंने मिट्टी की उर्वरक शक्ति (फर्टिलिटी पावर) को बढ़ाकर खेती करने के तरीके में एक्सपेरिमेंट करने की सोची। इसके लिए उन्होंने राजस्थान में की जा रही केसर की खेती...

63 इस किसान ने अपने गांव को बनाया मिनी इजरायल, सालाना 1 करोड़ की कमाई

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  इस किसान ने अपने गांव को बनाया मिनी इजरायल, सालाना 1 करोड़ की कमाई खेती किसानी के मामले में इजरायल को दुनिया का सबसे हाईटेक देश माना जाता है। वहां रेगिस्तान में ओस से सिंचाई होती है, दीवारों पर गेहूं, धान उगाए जाते हैं, भारत के लाखों लोगों के लिए ये एक सपना ही है। इजरायल की तर्ज पर राजस्थान के एक किसान ने खेती शुरू की और आज उनका सालाना टर्नओवर सुन कर आप उनकी तारीफ किए बिना नहीं रह पाएंगे। दिल्ली से करीब 300 किलोमीटर दूर राजस्थान के जयपुर जिले में एक गांव है गुड़ा कुमावतान। ये किसान खेमाराम चौधरी (45 वर्ष) का गांव है। खेमाराम ने तकनीकी और अपने ज्ञान का ऐसा तालमेल भिड़ाया कि वो लाखों किसानों के लिए उदाहरण बन गए हैं। आज उनका मुनाफा लाखों रुपए में है। खेमाराम चौधरी ने इजरायल के तर्ज पर चार साल पहले संरक्षित खेती (पॉली हाउस) करने की शुरुआत की थी। आज इनके देखादेखी आसपास लगभग 200 पॉली हाउस बन गये हैं, लोग अब इस क्षेत्र को मिनी इजरायल के नाम से जानते हैं। खेमाराम अपनी खेती से सलाना एक करोड़ का टर्नओवर ले रहे हैं। सरकार की तरफ से इजरायल जाने का मिला मौका राजस्थान के जयपुर जिला मुख्यालय से ल...

62 10 गुणा लाभ देने वाली इस तकनिकी का जवाब नही, हर गाँव तक पहुचनी चाहिए

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  10 गुणा लाभ देने वाली इस तकनिकी का जवाब नही, हर गाँव तक पहुचनी चाहिए मध्य प्रदेश के धार जिले के एक किसान रवि पटेल ने प्याज स्टोरेज की एक देसी कारगर तकनीक बनाई है। इसे अपनाकर वे दो साल से प्याज को खेत से निकालते ही 2 से 3 रुपए किलो के भाव पर बेचने के बजाय बारिश बाद 30 से 35 रुपए किलाे में बेच कर लाभ कमा रहे हैं। तीसरे साल भी उन्होंने प्याज का इसी तकनीक से स्टोरेज किया है। इस किसान ने देसी टेक्नोलॉजी से बनाया कोल्ड स्टोरेज, ऐसे करता है काम >> कैसे काम करती है रवि की ये टेक्नोलॉजी…  – रवि बंद कमरे में लोहे की जाली को जमीन से 8 इंच ऊंचा बिछाते हैं। ऐसा करने के लिए कुछ-कुछ दूरी पर दो-दो ईंटें रखते हैं। उसके ऊपर प्याज का स्टोरेज करते हैं। – लगभग 100 स्क्वेयर फीट की दूरी पर एक बिना पैंदे की कोठी रखते हैं। ड्रम के ऊपरी हिस्से में एक्जॉस्ट पंखे लगा देते हैं। – पंखे की हवा जाली के नीचे से प्याजों के निचले हिस्से से उठ कर ऊपर तक आती है। इससे पूरे प्याजों में ठंडक रहती है। – दोपहर में हवा गर्म होती है, इसलिए दिन की बजाय रातभर पंखे चलाते हैं। – पटेल ने इस तकनीक से 1000 क्विंटल प्या...

61 अब बिना मिट्टी और पानी के हवा में उगेंगे आलू ! पैदावार भी 10 गुना ज्यादा होगी

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  अब बिना मिट्टी और पानी के हवा में उगेंगे आलू ! पैदावार भी 10 गुना ज्यादा होगी करनाल. मिट्टी में तो आलू उगते सभी ने देखे होंगे लेकिन हरियाणा में अब हवा में आलू उगेंगे और पैदावार भी करीब 10 से 12 गुना ज्यादा होगी। हरियाणा के करनाल जिले में स्थित आलू प्रौद्योगिकी केंद्र में इस तकनीक पर काम पूरा कर लिया है, अप्रैल 2020 तक किसानों के लिए बीज बनाने का काम शुरू हो जाएगा। इस तकनीक का नाम है एरोपोनिक। इसमें जमीन की मदद लिए बिना हवा में ही फसल उगाई जा सकती है। इसके तहत बड़े-बड़े बॉक्स में आलू के पौधों को लटका दिया जाता है। जिसमें जरूरत के हिसाब से पानी और पोषक तत्व डाले जाते हैं। हरियाणा के करनाल जिले में स्थित आलू प्रौद्योगिकी केंद्र ने शुरू की एरोपोनिक तकनीक एक पौधा 40 से 60 छोटे आलू देगा, जिन्हें खेत में बीज के तौर पर रोपित किया जा सकेगा एरोपोनिक तकनीक से बड़े-बड़े बॉक्स में आलू के पौधों को लटका दिया जाता है। इस तकनीक में जरूरत के हिसाब से पानी और पोषक तत्व डाला जाता है। इस तकनीक में जड़ें बढ़ने लगती हैं तो उसमें आलू के छोटे-छोटे ट्यूबर बनने शुरू हो जाते हैं। एरोपोनिक तकनीक से बड़े-बड़े...

60 कहीं भी उगा सकते हैं बटन मशरूम, एक सीजन में 3 लाख तक कमाएं

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  कहीं भी उगा सकते हैं बटन मशरूम, एक सीजन में 3 लाख तक कमाएं नई दि‍ल्लीत। अगर खेतीबाड़ी के जरि‍ए अच्छीा कमाई करने के तरीका खोज रहे हैं तो बटन मशरूम की खेती एक अच्छाै ऑप्शकन हो सकता है। यह मशरूम की ही एक कि‍स्म  होता है, मगर इसमें मि‍नरल्स और वि‍टामि‍न खूब होते हैं। इसकी खासि‍यत ये है कि‍ आप एक झोंपड़ी में भी इसकी फायदेमंद खेती कर सकते हैं। मशरूम अपने हेल्थ बेनेफि‍ट्स की वजह से लगातार पॉपुलर हो रही है।फुटकर में इसका रेट 300 से 350 रुपए कि‍लो है। बड़े शहरों में तो यह इसी रेट में मि‍लता है। थोक का रेट इससे करीब 40% तक कम होता है। कई लोगों ने पारंपरि‍क खेती को छोड़कर मशरूम उगाना शुरू कर दि‍या है और अब अच्छी  खासी कमाई कर रहे हैं। जैसे गोरखपुर के कि‍सान राहुल सिंह। आगे पढ़ें कि‍तनी होगी कमाई उपज और मुनाफे का गणि‍त राहुल हर साल 4 से 5 क्विंटल कंपोस्टी बनाकर उसपर बटन मशरूम की खेती करते हैं। इतनी कंपोस्टज पर करीब 2000 कि‍लो मशरूम पैदा हो जाता है। एक क्विंटल कम्पोस्ट में डेढ़ किलो बीज लगते हैं। इसकी बाजार में कीमत 200 से 250 रुपए होती है। मशरूम का थोक रेट 150 से 200 रुपए कि‍लो है। ...

59 एक हेक्‍टेयर में 10 लाख की कमाई करा सकता है पपीता, ऐसे करें खेती

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  एक हेक्‍टेयर में 10 लाख की कमाई करा सकता है पपीता, ऐसे करें खेती नई दिल्ली. खेती से कमाई कराने के मामले में पपीता आपके लिए एक बेहतर विकल्पे हो सकता है। हाल के दौर में मार्केट में आई हाईब्रिड किस्मोंी के चलते पपीते से कमाई करना पहले से ज्याकदा आसान हुआ है। आप एक हेक्टेरयर पपीते की खेती से एक सीजन में करीब 10 लाख रुपए तक की कमाई कर सकते हैं। पपीते की खासियत यह है कि इसकी फसल जल्दीक तैयार होती है और साल भर मे फसल देने लगती है। एक ही फसल से आप 3 साल तक उपज भी ले सकते हैं। इसके चलते एक बार पेड़ तैयार होने पर लागत भी कम होती जाती है। आइए जानते हैं पपीते की खेती के बारे में और इसके जरिए कमाई कैसे संभव है।  भारत के ज्यादातर हिस्सों में कर सकते हैं पपीते की खेती पपीते की खेती के लिहाज से भारत एक उपयुक्तो देश है। इसे अधिकतम 38 से 44 डिग्री सेल्सियस तक तापमान में उगाया जा सकता है। ऐसा तापामान कमोबेश पूरे भारत में पाया जाता है। पतीते की खेती के लिए न्यूतनतम तापमान 5 डिग्री होना चाहिए। मतलब आप इसे पहाड़ों से सटे इलाकों में भी उगा सकते हैं। इस लिहाज से आप भारत के किसी भी कोने में रहते हैं...

58 इस इंजीनियर के बाग में उगे डेढ़ किलो के अमरूद, बिकते हैं ऑनलाइन

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  इस इंजीनियर के बाग में उगे डेढ़ किलो के अमरूद, बिकते हैं ऑनलाइन बांगर के अमरूद की धीरे-धीरे पूरे देश में डिमांड बढ़ रही है। अमरूद भी ऐसा की एक बार उसे देख लिया तो जिंदगी भर शायद ही उसे भूले। क्योंकि ये कोई आम अमरूद नहीं है। थाई किस्म के इस अमरूद का वजन औसतन एक किलो के आसपास रहता है। एक अमरूद ही पेट भर सकता है। ऐसे अमरूद जींद जिले के संगतपुरा गांव के साफ्टवेयर इंजीनियर नीरज ढांडा के बाग में इन दिनों खूब लग रहे हैं। वे उसकी बिक्री किसी सब्जी मंडी या दुकान में नहीं करते। सिर्फ ऑनलाइन ही उन्हें देश भर में बेच रहे हैं। इससे उन्हें भाव भी अच्छा खासा मिल रहा है। जहां से भी आर्डर मिलता है तुंरत उसकी सप्लाई कर देते हैं। इस सीजन में दिल्ली, चडीगढ़, पंचकूला, नोएडा, गुड़गांव, गाजियाबाद समेत कई शहरों में लोगों के ऑर्डर पर इसे ऑनलाइन बेचा गया। संगतपुरा निवासी सॉफ्टवेयर इंजीनियर नीरज ढांडा बताते हैं कि तीन साल पहले वे रायपुर गए हुए थे। इस दौरान उन्होंने एक फार्म में अमरूद की इस किस्म को देखा था। इसके बाद उनके मन में भी विचार आया कि क्यों खेती से अच्छी आय लेने के लिए कुछ किया जाए। इस पर वे वहां स...

57 एक ट्रिक ने बदली नौवीं पास दिव्यांग की किस्मत, हर साल कमाता है 15 लाख रूपए

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  एक ट्रिक ने बदली नौवीं पास दिव्यांग की किस्मत, हर साल कमाता है 15 लाख रूपए कभी दूसरे किसानों के खेतों में मजदूरी करने वाला दिव्यांग लड़का मुनगा की खेती कर अपनी चार साल की मेहनत से करोड़पति बना है। वहीं उसने लाखों किसानों को मार्गदर्शन किया है। उसकी सफलता देख देश भर से लाखों किसान उसके खेत पर पहुंच रहे हैं। वहीं उसके मार्गदर्शन से महाराष्ट्र खासकर सूखा पीड़ित मराठवाड़ा के हजारों किसानों कर्ज से मुक्त हुए हैं।  हर साल एेसे कमाता है 15 लाख…. सोलापुर के माढा तहसील के तहत उपलाई गांव में रहने वाले किसान बालासाहब पाटिल (30) की माली हालत चार साल पहले ठीक नहीं थी। बालासाहेब अपने अपने भाई के साथ दूसरे किसानों के खेतों में मजदूरी करते थे। सिर्फ नौंवी तक पढ़ाई होने से उन्हें दूसरी जगह कोई काम भी नहीं देता था। घर की हालत इतनी खराब थी कि, घर के लोगों को दिन में सिर्फ एक वक्त का खाना मिलता था। यहां तक उनकी आर्थिक हालत की वजह से लोग उधार भी नहीं देते थे। एेसे बदली किस्मत एक दिन गांव के किसान गणेश कुलकर्णी ने बालासाहब की हालत देख उन्हें अपने पास बुलाया और मुनगा की खेत करने के लिए प्रोत्साहित...

56 खेती जैविक खेती से कैसे मुनाफा कमाए, ऑस्ट्रेलिया से अपने देश लौटी इस महिला किसान से समझिए

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  खेती जैविक खेती से कैसे मुनाफा कमाए, ऑस्ट्रेलिया से अपने देश लौटी इस महिला किसान से समझिए ऑस्ट्रेलिया की वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी से पर्यावरण प्रबंधन में ग्रेजुएशन करने वाली पूर्वी व्यास की ज़िंदगी उनके एक फैसले ने पूरी तरह बदल दी। अब वह पूरी तरह से जैविक किसान बन चुकी हैं। वह अगली पीढ़ी के किसानों और युवाओं को सिखा रही हैं कि किस तरह खेती करके भी अच्छी ज़िंदगी बिताई जा सकती है। 1999 में अपना पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद पूर्वी ऑस्ट्रेलिया से लौटकर भारत आ गईं और उन्होंने कुछ गैर सरकारी संगठनों के साथ मिलकर स्थिरता और विकास के लिए काम करना शुरू कर दिया। 2002 में उन्हें प्रसिद्ध पर्यावरणविद् बीना अग्रवाल के साथ एक प्रोजेक्ट पर किसान समुदाय के लिए काम करने का पहला मौका मिला। इस रिसर्च के लिए वह दक्षिणी गुजरात के नेतरंग और देडियापाड़ा जैसे आदिवासी इलाकों में गईं। इस विडियो में देखिए इनका अब तक का सफ़र >> यहां रहने से मुझे समझ में आया कि शहर में रहने वाले लोगों की पर्यावरण के प्रति गंभीरता की बातों और उनके रहन-सहन में पर्यावरण को शामिल करने के बीच कितनी गहरी खाई है, और इसमे...

55 मशरुम गर्ल ने ऐसे खड़ी की करोड़ों रुपए की कंपनी, हजारों महिलाओं को दिया रोजगार

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  मशरुम गर्ल ने ऐसे खड़ी की करोड़ों रुपए की कंपनी, हजारों महिलाओं को दिया रोजगार महिला किसान की बात करने पर लोगों के जेहन में अभी तक सिर्फ महिला मजदूरों की तस्वीर आती थी, लेकिन कुछ महिलाएं सफल किसान बनकर इस भ्रम को तोड़ रही है। उत्तराखंड की दिव्या रावत मशरूम की खेती से सालाना एक करोड़ से ज्यादा की कमाई करती है, उनकी बदौलत पहाड़ों की हजारों महिलाओं को रोजागार भी मिला है, जिसके लिए उन्हें 8 मार्च यानि बुधवार को राष्ट्रपति नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित भी करेंगे। आठ मार्च को महिला दिवस के मौके पर जब राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी देशभर में मिसाल बनी महिलाओं को सम्मानित कर रहे होंगे तो उनमें एक पहाड़ की बेटी भी होगी। चमोली जिले की रहने वाली दिव्या रावत (27 वर्ष) को पहाड़ की हजारों हजार को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने के लिए नारी शक्ति 2016 के अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा। दिव्या को मिलने वाले इस अवार्ड को लेकर पहा़ड़ों पर अभी से जश्न का माहौल है। देखिए इनके सफ़र की कहानी >> पलायन रोकने के लिए दिल्ली से लौटी उत्तराखंड उत्तराखंड राज्य के चमोली (गढ़वाल) जिले से 25 किलोमीटर दूर कोट कंडार...

54 तुलसी करा सकती है लाखों में इनकम, जानें कैसे करें बिजनेस

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  तुलसी करा सकती है लाखों में इनकम, जानें कैसे करें बिजनेस नई दिल्‍ली. कम समय और कम लागत में कमाई का विकल्‍प तलाशने वालों के लिए मेडिसिनल प्‍लांट (औषिधीय पौधों) की खेती और बिजनेस काफी लाभदायक हो सकता है। इन प्‍लांट की खेती के लिए न तो बड़ुत बड़े फार्म की जरूरत होती है और न ही ज्‍यादा इन्‍वेस्‍टमेंट की। इनकी खेती आप कांट्रेक्‍ट पर खेत लेकर भी कर सकते हैं। ज्‍यादातर औषिधीय पौधों की फसल 3 से 6 महीने की होती है। इसके बाद आप इनसे  लगातार इनकम कर सकते हैं। मसलन अगर आप तुलसी की खेती करते हैं तो महज 15 से 20 हजार रुपए के इन्‍वेस्‍टमेंट से आप केवल 3 महीने में 3 से 4 लाख रुपए तक इनकम कर सकते हैं। आईए आपको बताते हैं और कौनसे ऑषिधीय पौधे हैं जिनकी आधुनिक खेती से आप अच्‍छी खासी इनकम कर सकते हैं…. सिर्फ 3 महीनों की है तुलसी की फसल तुलसी को ज्‍यादातर धार्मिक मामलों से जोड़कर देखा जाता है लेकिन, इसके औषिधीय गुणों के कारण तुलसी की बाजार में भी बेहद डिमांड है। लंबे समय से कई दवा कंपनियां इसके तेल का इस्‍तेमाल विभिन्‍न दवाओं में कर रही हैं। तुलसी की फसल को अप्रैल-मई में शुरू किया जा सकता है। इसक...

53 किसान की सफलता की कहानी – अब बाबा रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद से होगा एग्रीमेंट

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  किसान की सफलता की कहानी – अब बाबा रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद से होगा एग्रीमेंट आज जहां खेती के मायने बदलते जा रहे हैं, वहीं एलोवेरा की खेती अपने आप में एक मिसाल बन चुकी है। बहुत ही कम खर्च से किसान लाखों कमा सकते हैं। इसी तरह जींद में भी एक किसान के दिन बदलने वाले हैं। आने वाले समय में आप योग गुरु बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड (Patanjali Ayurveda Limited) का जो भी एलोवेरा प्रोडक्ट (Aloevera Product) खरीदेंगे, उसके लिए एलोवेरा उनके खेत से सप्लाई होगा। साढ़े  8  एकड़ जमीन पट्‌टे पर लेकर लगाया एलोवेरा… – जींद जिले के गांव अशरफगढ़ के सोनू पांचाल 12वीं पास हैं। उन्होंने गांव के पास ही साढ़े 8 एकड़ जमीन इसलिए पट्‌टे पर ली है। उनके पास जमीन नहीं है। बावजूद इसके उन्होंने कई साल पहले बागवानी विभाग (Horticulture department) से एलोवेरा की खेती करने की ट्रेनिंग ली। – इसके बाद प्रदेशभर में किसानों को एलोवेरा की खेती के लिए प्रेरित किया। कैसे लगाया जाए और देखरेख की जाए, कहां इसे बेचा जा सकता है, इसके बारे में जानकारी देकर वह 100 से ज्यादा किसानों को एलोवेरा की खेती के लिए प...

52 खरगोश पालने के शौक से लखपति बन गया ये शख्स, इनकम इतनी जितना इन्होने भी नहीं सोचा था

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  खरगोश पालने के शौक से लखपति बन गया ये शख्स, इनकम इतनी जितना इन्होने भी नहीं सोचा था जींद के संजय कुमार देशभर के पेट शॉप्स में रैबिट सप्लाई करते हैं। उनके इस प्रोफेशन की कामयाब कहानी के पीछे बड़ी दिलचस्प कहानी है। संजय को बचपन से रैबिट पालने का शौक था और घरवाले इससे नाराज थे। बावजूद इसके उन्होंने अपने शौक को जिंदा रखने के लिए इंटरनेट से जानकारी जुटाने के बाद ट्रेनिंग ली और 9 साल में शौक इतना बड़ा प्रोफेशन बन गया। अपने रैबिट फार्म से संजय कुमार लगभग 10 लाख सालाना कमा रहे हैं। घरवालों ने कर दिया था पैसे देने से इनकार… – शहर के रोहतक रोड बाईपास पर आधा एकड़ जमीन पर बना उनका रैबिट फार्म प्रदेश में सबसे बड़ा रैबिट फार्म है। इन दिनों इस फार्म में 6 नस्लों के 500 से ज्यादा खरगोश हैं। – संजय कुमार बताते हैं कि वर्ष 2008 में सिर्फ 100 खरगोश से व्यवसाय शुरू किया था। इसके बाद धीरे-धीरे खरगोशों की संख्या बढ़ाई। – दूर-दूर से लोग उनसे रैबिट फार्मिंग के बारे में जानकारी लेने के लिए आते हैं। रैबिट फार्मिंग के इस कारोबार से संजय कुमार को आय भी अच्छी-खासी प्राप्त हो रही है। – संजय की मानें तो उनके य...